शुक्रवार, 24 जून 2016

Miragpur / मिरगपुर / میرگپور

मिरगपुर, पंवार गोत्र के गुर्जरों का एक मुख्य और आदर्श गाँव है | यह दिल्ली से करीब 165 कि०मी० तथा देवबंद से 8 कि०मी० की दूरी पर, उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित है | यह गांव काली नदी के किनारे पर बसा हुआ है |
पंवार गोत्र के अतिरिक्त मिरगपुर में मावी गोत्र के गुर्जरों का सिर्फ एक घर है |
मिरगपुर के विषय में सबसे सराहनीय बात यह है कि इस गाँव के लोग शराब, धूम्रपान, हुक्का इत्यादि का सेवन नहीं करते| सम्भवतः सम्पूर्ण भारत में सिर्फ मिरगपुर ही एक ऐसा गांव है | 2010 में इस गांव को निर्मल श्रेणी में राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है | इस गाँव के बारे में दूरदर्शन पर भी एक कार्यक्रम प्रसारित हुआ है | इसके अतिरिक्त विभिन्न अख़बारों, मैगजीन एवं रेडियो पर भी काफी बार मिरगपुर के विषय में जिक्र हो चुका है |
शराब, धूम्रपान के अलावा यहाँ लहसुन, प्याज, बंदगोभी, लालमूली जैसी 32 खाद्य पदार्थ का सेवन निषेध है | श्री गुरु बाबा फकीरा दास द्वारा निर्धारित इन नियमों को इस गाँव के मूल निवासी करीब पिछले 400 सालों से पूरी आस्था से मानते आ रहे है | विवाह के पश्चात इस गाँव की बेटियों इन नियमों को त्यागने या अपनाये रखने की पूर्ण स्वतंत्रता है लेकिन गाँव में विवाह पश्चात आई वधुओं को यह नियम मानने की अनिवार्यता है | श्री बाबा गुरु फकीरा दास के नियमों से सिर्फ गुर्जर समुदाय के लोग बाध्य है और दुसरे समुदाय के निवासी इनसे पूर्णत: स्वतंत्र है | परन्तु अपनी इच्छानुसार दुसरे समुदाय के निवासी भी इन सभी नियमों का मानते है |
इन नियमों का उल्लंघन करने वालों को गाँव के द्वारा उचित दण्ड भी दिया जाता है | प्राय: यह दण्ड बहुत कठोर नहीं होते, क्योंकि मिरगपुरवासियों का माना है कि ऐसे लोगों को श्री बाबा खुद दण्ड देते है | गाँव के लोग बताते है कि जिन लोगों ने इन नियमों का पालन नहीं किया था, उनका पूरा परिवार अप्रकार्तिक मृत्यु की वजह से पूरी तरह से ख़त्म हो गए |
जोवन, धन, जल नदी का, और मेघा की छांव |
कहे फकीरा स्थिर नहीं, जैसे जल पर नाव ||
श्री गुरु बाबा फकीरा दास की यह पंक्तियाँ आज भी मिरगपुर वासियों को याद है और श्री गुरु बाबा फकीरा दास की याद में मिरगपुर में हर वर्ष एक मेले का आयोजन किया जाता है | उनकी याद में गाँव में एक आश्रम का भी निर्माण हुआ किया गया है, जहाँ पर प्रतिदिन दो बार पूजा करी जाती है |
मिरगपुर की जनसंख्या लगभग दस हज़ार है जिसमे के करीब साड़े छः हज़ार मताधिकारी है |
मिरगपुर की करीब 12 दुकानों में से मात्र 2 दुकानों पर ही बीडी, सिगरेट उपलब्ध है | ऐसा इसलिए की गाँव में विभन्न कारणों से आये लोग (उदहारणत: मकान अथवा खेतों में कार्यरत मजदूर इत्यादि ) आवश्यकतानुसार यहाँ से ऐसी वस्तुएं खरीद सकें |
मिरगपुर में कुल तीन सरकारी विद्यालय है, जिसमे से एक इंटर-कॉलेज, एक माध्यमिक और एक प्राथमिक विद्यालय है | मिरगपुर गाँव के सतेन्द्र पंवार रूड़की इंजीनियरिंग कॉलेज से पास होने वाले सबसे पहले विद्यार्थी थे | पूर्व ग्रहराज्य मंत्री एवं किसान नेता श्री राजेश पायलेट (बिधूड़ी) का इस गाँव के साथ बहुत लगाव था, तथा काली नदी पर बना पुल उन्ही की देन है |